शीर्षक- धर्म के नाम पर लड़ने वालो
धर्म के नाम पर लड़ने वालो ,
बेकसूर लोगो का लहू बहाने वालो,
तुम दोनों जहान में धक्के खाओगे,
अपना अशुभ मुख कैसे मालिक को दिखलाओगे ,
बुरे कर्मों के कारण धिक्कारे जाओगे,
सिर्फ पछताओगे ही पछताओगे।
धर्म कभी खून बहाना नहीं सिखलाता,
किसी का दुख दर्द कभी भी खुशी नहीं बढाता,
नीच कर्म करने वाला नीच ही कहलवाता ,
अंधभक्त बनकर मानवता को भुलाता,
घृणित कार्य करके दुष्ट बन जाता,
कायरों जैसा काम कायर ही कहलाता ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
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