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बुधवार, 30 अप्रैल 2025

पानी का बुलबुला

 शीर्षक - पानी का बुलबुला

पानी का बुलबुला है जीव

करता बहुत अभिमान 

सुंदर मनमोहक काया 

एक दिन पहुंच जाएगी श्मशान 

आधे अधूरे रह जाएगे दिल के अरमान 

आएगा जब मौत का फरमान 

पड़ा होगा एक तरफ जगह होगी बिल्कुल सुनसान 

सिर्फ पछतावा होगा  समय जाएगा गुजरान 

भाई रे समय बड़ा बलवान 

अब तो सीख साधु-संतन की मान 

हर पल जप ले हरिनाम 

तेरा जीवन ईश्वर का वरदान 

झूठा बंधन है सिर्फ मोह-माया का मान 

जग भी छूट जाता जब तन से जुदा होते प्राण ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




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