फ़ॉलोअर

शुक्रवार, 2 मई 2025

प्रीतम

 शीर्षक -  प्रीतम

प्रीतम तेरे प्रेम में, बार दूं  जिंद जान ,

रोम रोम में बस जाए, तेरा अमूल्य नाम ।

जग सारा झूठ है,सच ले यह मान 

तेरा मेरा छोड़कर, भज ले केवल हरिनाम। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...