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शुक्रवार, 2 मई 2025

भवसागर

 शीर्षक- भवसागर 

भवसागर में डूबता जा रहा जीव  ,

अब तो कुछ रहमत कर दे मेरे पीर ।

मेरी वेदना  समझ मेरे पीव,

मेरे हृदय में मार दे प्रेम वाला तीर।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 





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