शीर्षक- भवसागर
भवसागर में डूबता जा रहा जीव ,
अब तो कुछ रहमत कर दे मेरे पीर ।
मेरी वेदना समझ मेरे पीव,
मेरे हृदय में मार दे प्रेम वाला तीर।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...
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