शीर्षक - तन मन में गोपाल
तन मन में बसा लो गोपाल, फिर मन में आता नहीं कोई सवाल
दुनियादारी के छोड़कर जंजाल, भज ले केवल दीनदयाल
बिन गोपाल होगा बुरा हाल , सब ओर बैठा तेरा काल
हरिशरण में बांका न होगा तेरा बाल ,प्रभु ही कालों के काल।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
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