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बुधवार, 7 मई 2025

सुबह सुबह ठंडी हवा

 शीर्षक  - सुबह सुबह ठंडी हवा 

सुबह सुबह ठंडी चलती है  हवा 

चहुंओर है शांति की गवाह 

श्वासों में मिठास सी जाती है घोलती 

प्यार की मीठी सी बोली है बोलती 

ध्यान अपनी ओर सबका है मोड़ती 

लगता  जैसे जाती है दौड़ती 

सबको बिना भेदभाव से पहुंचाती है ठडंक 

तूफ़ान में लगती है सबको दंडक ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 





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