शीर्षक - मोबाइल फोन
मोबाइल फोन में उलझा संसार
भूला बैठा रिश्ते दुनियादारी का व्यवहार
मोबाइल फोन में घुसाए रहता सिर
भविष्य की नहीं इसको अब फिक्र ।
स्नैपचाॅट , व्हाट्सऐप , टेलीग्राम में व्यस्त
चाहे आगे पीछे चलत रहे अस्त्र-शस्त्र
फेसबुक फाॅलोवर बढाने की चिंता
पूरा दिन मोबाइल फोन चलाने में निकलता ।
मोबाइल फोन के चक्कर में,
सब बन गए उल्लू
अब नहीं भाता सबको ,
जाना मनाली कुल्लू ।
मोबाइल ने बनाया सबको अंधा
अपनी पहचान भूल गया इंसानी बंदा
विचारों का भी हो गया गंदा
मोबाइल फोन है मैला धंधा।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
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