शीर्षक - सरहद के लोगों की मुश्किले
सरहद पर रहने वालों का होता बुरा हाल
सब कुछ सहते वे बनकर लाचार
गोला गोली चलती दोनों तरफ
सब कहते फिरते सरहद पर रहने वालो का बड़ जिगर
बचाते फिरते अपने वो प्राण
भूखे के मारे फिरते देता नहीं कोई अन्न दान
देश - देश में होती जब तकरार
हमेशा पीसता सरहद पर रहने वाला परिवार
बड़े- बड़े गोलों से टूट जाते उनके मकान
कई लोगों की जाती जान
सरकार करती जब सीजफायर का ऐलान
कोई नहीं पूछता जिनकी सरहद पर जाती जान
सरहद पर रहना बहुत दुखकारी
देशों की लड़ाई में पीसती सरहद की जनता बेचारी ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें