शीर्षक - युद्ध
युद्ध है विनाश का दूजा नाम ,
बर्बादी पर लगता नहीं कोई विराम ,
मरता हमेशा इसमें इंसान,
बचाए नहीं बचती किसी की जान ,
धमाकों से बहरे हो जाते कान ,
इंसान इंसान को मारना समझता अपनी शान,
खाने को नहीं मिल पाता खान पान,
भूल जाते सभी करना दान ,
मुश्किल में पड़ जाते प्राण ,
युद्ध का होता यही परिणाम,
जान माल का होता बहुत नुकसान,
फिर भी करते युद्ध का गुणगान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
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