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गुरुवार, 8 मई 2025

युद्ध

 शीर्षक - युद्ध

युद्ध है विनाश का दूजा नाम , 

बर्बादी पर लगता नहीं कोई विराम ,

मरता हमेशा इसमें इंसान,

 बचाए नहीं बचती किसी की जान ,

धमाकों से बहरे हो जाते कान , 

इंसान इंसान को मारना समझता अपनी शान,

खाने को नहीं मिल पाता खान पान, 

भूल जाते सभी करना दान ,

मुश्किल में पड़ जाते प्राण ,

युद्ध का होता यही परिणाम,

जान माल का होता बहुत नुकसान, 

फिर भी करते युद्ध का गुणगान।  


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 






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