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मंगलवार, 13 मई 2025

बाहरी भेष त्याग कर

 शीर्षक  -     बाहरी भेष त्याग कर

बाहरी भेष त्याग कर, अंतर कर प्रवेश

जिसमें तूं उलझ रहा , यह नहीं तेरा देश ।

बाहर धर्म कर्म छोड़कर,  सतगुर संग सच्ची प्रीत लगा 

मन विकार मिटाकर, तन नाम बीज उगा ।



 स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




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