शीर्षक - गृह स्वामिनी की सुनो कहानी
दिनांक-०४/०२/२०२१
गृह स्वामिनी की सुनो कहानी
कुर्बान करती है पूरी जवानी
पति के संग सदा खड़ी हूं
प्रेम रंग में सदा रंगी हूं
अपना मुझे कोई मोह नहीं
परिवार के लिए हंसती रोती हूं
बच्चों को खूब पढ़ाऊं
अच्छे अच्छे संस्कार सिखाऊं
मेरा परिवार ही मेरा संसार है
परिवार के लिए कुर्बान होना ही मेरा संस्कार
सब का दुख दर्द हूं बांटती
अपना दुख छिपाती हूं
घर की हर जिम्मेदारी खूब निभाऊं
अपना आराम सदा भूल जाऊं
मेरी इच्छा का हर कोई सम्मान करो
मेरी कुर्बानियों का कोई तो गुनगान करो
हर दिल में मैं राज करूं
हर खुशी के लिए अपने को कुर्बान करूं।
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर
जम्मू
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