शीर्षक - आलस
दिनांक ०५/०२/२०२१
आलस आलस में अलसाया
कोई काम कर नहीं पाया
जीवन का भूल गया मोल
बन गया समय का चोर
खा पीकर रहा मैं सोया
आलस में रहा सदा मैं खोया
जीवन में कोई लक्ष्य न बनाया
अपना जीवन व्यर्थ गंवाया
बहाने बनाने का किया कर्म
अब आती है बहुत शर्म
सुख का साधन बन नहीं पाया
दुखों ने आकर गले लगाया
परख ना पाया सत्य की सीख
सारी उम्र मांगनी पड़ेगी भीख।
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
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