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बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

अधर्म कमा गया

 दिनांक - ११/०२/२०२१

विधा - पद्य

शीर्षक - अधर्म कमा गया

धर्म धर्म करता रहा

अधर्म कमा गया  

धर्म के नाम पर

लोगों को लड़ा गया

ईमान की बात करता रहा

बेईमानी का पैसा बैकों में जमा करवाया गया

जननायक बनने का लालच 

मुझे इंसानियत से गिर गया

रामराज्य का सपना दिखाकर

रावणराज की नींव रखा गया

मेरी कथनी करनी का अंतर

जनता की समझ में आ गया।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर,जम्मू


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