दिनांक १२/०२/२०२१
विधा - पद्य
शीर्षक - बसंत आया
हर्षोल्लास का उत्सव बसंत है आया
चारों ओर हरियाली लाया
पतझड़ का अब हुआ अंत
सब पेड़ पौधों में आई नई खुशी उमंग
हरियाली ही हरियाली छाई
लगता है नई नवेली दुल्हन सज धज के आई
पीली पीली सरसों लहरा रही है
सब का मन लुभा रही है
नई नई कोंपले उग आई
नवजीवन का संदेशा लाई।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
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