दिनांक १२/०२/२०२१
विधा - भजन
शीर्षक - पाप करके अब गई हार रे
पाप करके अब गई हार रे
पहुंच गई तेरे द्वार रे ।
तूं समर्थ ,अगम अगोचर
दिल मेरे का ,जानत हाल रे
पाप करके अब गई..........
पाप पुण्य का भेद न जानूं
मोह माया संग सदा लपटानूं
पाप करके अब गई ...........
पूजा व्रत की विधि न जानूं
कैसे रीझाऊं तुम्हें नाथ रे
पाप करके अब गई ..........
मोहे नीच का तूं ही सहारा
उदार ले अब की बार रे
पाप करके अब गई ..........
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
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