दिनांक - १३/०२/२०२१
विधा - पद्य (कविता)
शीर्षक - श्याम मैं तेरी बिरहिणी
श्याम मैं तेरी बिरहिणी
मानती हूं मैं नहीं राधा ,रूक्मणी
हृदय की सेज सजाया बैठी हूं
दरस तेरे की आस लगाया बैठी हूं
तूं जलनिधि मैं प्यास हूं
तुझे रिझाने का करती हूं हर प्रयास
तुम सागर मैं बूंद हूं
मिलने के लिए अधीर हूं
तेरे बिन मेरी क्या कहानी
जल थल समाया तुम मेरे स्वामी
कुबजा का किया उद्धार
सुंदर रूप दिया उपहार
मेरी विनती पर करो विचार
मोहे नीच का करो उद्धार।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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