दिनांक -१३/०२/२०२१
आज की विधा- युगपुरुष
संसार में जब अंधेरा छाता है
ज़ुल्म करना स्वभाव बन जाता है
बदलाव लाने के लिए जो आवाज उठाता है
बहती नदी की तरह,
अपने रोड़े स्वयं ही हटाता है
आगे बढ़ना ही जिसका लक्ष्य बन जाता है
सुख दुख की परवाह किए बिना
अपना कर्तव्य निभाता है
राष्ट्र को एक करने के लिए
अपना सर्वस्व लुटाता है
वहीं इस ज़हान में युगपुरुष कहलाता है
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
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