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शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

अंधकार का अब हुआ नाश

 दिनांक - १४/०२/२०२१

 विधा -  पद्य (कविता)

शीर्षक - अंधकार का अब हुआ नाश 

अंधकार का अब हुआ नाश 

निकल आया सूर्य का प्रकाश

आलस की कमर तोड़ 

स्फूर्ति लाया चारों ओर

 धर्म ग्रंथों का होगा गान 

मिट जाएगा मन का अज्ञान

प्रेम भक्ति की धुन बजेगी

विकारों की मैल दूर हटेगी

सब मिलकर प्रभु के भजन गायेंगे

प्रेम रस में डूबे जाएंगे

अहम का मिटेगा भाव 

सब में दिखेगा निर्मल प्रकाश

धर्म के नाम पर अब लड़ेगा न‌  कोई

सब में प्रेम प्रीत होई 

विश्व बंधुत्व का लाया संदेश

सब में समाया परम देव 

सब मिल बांटकर खाएंगे

खुशी खुशी जीवन बिताएंगे।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू-कश्मीर, जम्मू












 

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