कविता है कवि के मन की आवाज
साधु-संत का संग ,मिटाता कोटि पाप
वचन मान भक्ति कर, मिट जाता आपा भाव
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साधु-संत का संग ,मिटाता कोटि पाप वचन मान भक्ति कर, मिट जाता आपा भाव
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