🙏🙏🙏 नमन मंच 🙏🙏🙏
दिनांक- २२/०२/२०२१
दिन- सोमवार
विषय - वीरता
विधा - कविता
वीरता का गुण जिसके रोम रोम में समाया
कभी झुकता नही किसी का झुकाया
जुल्मी का करता है डटकर मुकाबला
दुश्मन जोश को ही देखकर है भागता
तलवार भी क्या कर सकती है
उठाने वाले में साहस न हो
बुलंद होने चाहिए हौसले
चाहे हाथों से वार करो
कुर्बान होना उनका सफल है
मिसाल वीरता की जिसने कायम की
देश धर्म के लिए मर मिटने की राह
स्वयं ही जिसने चयन किया
मौत को खुशी से गले लगाने वाला
वीरता का प्रतिबिंब है |
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
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