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गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

सफर कटता नहीं हमसफ़र के बिना

 #नमन मंच 🙏🙏🙏

#साहित्यिक महफ़िल

#दिनांक 17 सितम्बर,2021 

#दिन शुक्रवार

#विषय - हमसफ़र या जीवन

शीर्षक - सफर कटता नहीं हमसफ़र के बिना

#विधा - संस्मरण

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25 अगस्त  ,2011 का दिन मुझे कभी भूलता नहीं है । खुशी से आगे बढ़ती हुई जिंदगी कब गमों में खो गई पता ही नहीं चला । जीवनसाथी के छूटने का आभास भी मैंने महसूस नहीं किया । अगर पता होता कि उनके साथ मेरी यह अंतिम मुलाकात है मै उनको घर से कभी बाहर नहीं जाने देती । मुझे लगता है मौत भी उनका इंतजार कर रही थी। 

उनके घर से निकलने के बाद 10 मिनट में फोन की घंटी बजना शुरू हो गयी। मैंने जैसे ही फोन उठाया, एक आदमी बोला मनोज तिवारी जी की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई है आप तुरंत वहाँ पहुंचे। फोन पर यह सुनते ही मैं बेहोश हो गई। 

मेरी बेटी और बेटे ने मुझे आकर उठाया और मेरे मुंह में पानी की कुछ बूंदें डाली, अब मुझे कुछ होश आया। अब हम रिक्शा में बैठकर दुर्घटना वाली जगह पहुंच गए। लेकिन कुछ लोग तब तक उनको अस्पताल ले जा चुके थे। अब हम सीधे अस्पताल की ओर रवाना हुए।  

अस्पताल पहुंचते ही यह खबर मिली जिनकी गाड़ी फव्वारा चौक के पास  दुर्घटनाग्रस्त हुई है उनकी मृत्यु हो चुकी है। यह खबर सुनकर मैंने अपना आपा ही खो दिया । कुछ समय के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे की मेरी तो सारी दुनिया ही खत्म हो गई है। मैंने अपने आप को बेसहारा ही मान लिया था, मेरा तो जीने का उद्देश्य ही खत्म हो गया था । 

बेटी और बेटे ने बहुत सहारा दिया । लेकिन उनकी कमी हमेशा खलती है। जिंदगी का यह लंबा सफर उनके बिना काटना बहुत मुश्किल लगता है।  जब भी उनके बारे में सोचती हूँ आंखें आंसू से भर जाती है और जीवन जीना बड़ा मुश्किल लगता है  । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




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