# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्यिक महफ़िल
# दिनांक - 12/09/2021
# दिन - रविवार
षय - आईना/दर्पण
# विधा - गद्य/पद्म
मन दर्पण है विचारों,
अच्छे बुरे ख्यालों का ।
जो होता है वही दिखता,
कोई पर्दा नहीं छिपता ।
जो सामने होता ,
उसी सत्य का ज्ञान कराता ।
विवेक दर्पण आत्मा का ,
सत्य का राह हर क्षण दिखाता।
पाप पुण्य का फल बताता,
नासमझ समझ नहीं पाता।
दर्पण जो होता है वही दिखाता ,
सच्चाई को स्वीकार करना सिखलाता ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर जम्मू
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