फ़ॉलोअर

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

दर्पण

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्यिक महफ़िल

# दिनांक - 12/09/2021

# दिन - रविवार

षय - आईना/दर्पण

# विधा - गद्य/पद्म

 मन दर्पण है विचारों, 

अच्छे बुरे ख्यालों का । 

जो होता है वही दिखता, 

कोई पर्दा नहीं छिपता । 

जो सामने होता , 

उसी सत्य का ज्ञान कराता । 

 विवेक दर्पण आत्मा का , 

सत्य का राह हर क्षण दिखाता। 

पाप पुण्य का  फल बताता, 

नासमझ समझ नहीं पाता। 

दर्पण जो होता है वही दिखाता , 

सच्चाई को स्वीकार करना सिखलाता । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर जम्मू






कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...