# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई
# दिनांक - २७/०२/२०२१
# दिन - शनिवार
# विषय - दर्पण क्या बोलता है
# विधा - स्वैच्छिक छंदमुक्त कविता
आत्मा का दर्पण सत्य का दिखाता है
दिखावे से बचाता है
किताबों का दर्पण ज्ञान सिखाता है
कोई विरला जन ही ग्रहण कर पाता है
मन दर्पण संगत की रंगत का
संगत की रंगत के अनुसार फल पाता है
वाणी दर्पण शब्दों की
जो अक्षर बोलता वही वाक्य बन जाता है
भकि्त दर्पण भावनाओं की
भावना अनुसार रस पाता है
दर्पण जैसी हो काया
वैसी ही छाया दिखाता है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
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