# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई
# दिनांक - २७/०२/२०२१
# दिन - शनिवार
# विषय - पवन/समीर
# विधा - छंदमुक्त कविता
करती ना किसी से कोई भेदभाव
चलती हमेशा अपने प्रवाह
कण कण को उडने का देती मौका
साथ चलने का देती हौका
सरहदों की दीवार न माने
यही इसके कारनामे
कभी मंद कभी उन्माद
मचाती है बहुत उत्पाद
भीनी भीनी खुशबू फैलाती
वातावरण पूरा महकाती
दूर दूर सब को पहुंचाती संदेश
चल पड़ती देश परदेश
ठंडी ठंडी सब को भाती
खुशी खुशी लगता है सहलाती ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
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