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शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

भूल गया अपने संस्कार

 नमन मंच

दिनांक - २०/०२/२०२१

विधा - पद्म 

शीर्षक - भूल गया अपने संस्कार

निंदा चुगली  का उठाया भार

भूल गया अपने संस्कार

स्वयं को मान लिया गुणवान

बन बैठा महाविद्वान 

हृदय में जम गई विकारों की मैल 

सब से मोल लिया है बैर 

असहाय का बना न सहारा 

सारा जन्म व्यर्थ गुजारा

पराया हक़ खूब हैं खाया

कभी किसी पर तरस न आया

लूट लूट कर घर भर ली माया 

धर्म कर्म कुछ कर न पाया

दीन दुखी की लगेगी हाय

रे पापी!  तूने कैसे कर्म कमाएं

सब कुछ छोड़ यहाँ से जाएगें

अंत में फिर पछतायेगा  ।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू एवं कश्मीर, जम्मू




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