शीर्षक - निराशा आशा में बदल जाती है
निराशा आशा में बदल जाती ,
मेहनत करने की ठान लें,
छोटी- सी चींटी बार- बार गिरकर ,
फिर लग जाती है काम,
नदी की ओर देखो ,
कितने विघ्न बाधाओं को पार करती ,
पहुंच जाती है सागर धाम में,
जिसने ठान लिया कुछ करने का ,
विघ्न बाधाओं से नहीं घबराता ,
कभी न अपना लक्ष्य छोड़,
पैर पीछे खिसकता है,
हार जीत का प्रश्न छोड़,
परिश्रम में लग जाता है ,
सफलता असफलता का मूल्य नहीं ,
पुरुषार्थ करना ही शुभ कर्म कहलाता है ,
जिसने कुछ करने का ठानी लिया,
अपना मार्ग स्वयं बनाता है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर, जम्मू
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