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बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

निराशा आशा में बदल जाती है

शीर्षक - निराशा आशा में बदल जाती है

निराशा आशा में बदल जाती , 

मेहनत करने की ठान लें, 

छोटी- सी चींटी बार- बार गिरकर , 

फिर लग जाती है काम, 

नदी की ओर देखो , 

कितने विघ्न बाधाओं को पार करती , 

पहुंच जाती है सागर धाम में, 

जिसने ठान लिया कुछ करने का , 

विघ्न बाधाओं से नहीं घबराता , 

कभी न अपना लक्ष्य छोड़, 

पैर पीछे खिसकता है, 

हार जीत का प्रश्न छोड़, 

परिश्रम में लग जाता है , 

सफलता असफलता का मूल्य नहीं , 

पुरुषार्थ करना ही शुभ कर्म कहलाता है , 

जिसने कुछ करने का ठानी लिया, 

अपना मार्ग स्वयं बनाता है।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू


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