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रविवार, 7 फ़रवरी 2021

प्रेम प्रीत

 दिनांक - ०८/०२/२०२१

शीर्षक - प्रेम प्रीत 

प्रेम प्रीत की जात नहीं

इसकी कोई रात नहीं

प्रेम प्रीत है अविचल अविनाशी

सब ओर दिखे पूर्ण अविनाशी

प्रेम प्रीत का रंग है ऐसा 

संसार दिखे खेल तमाशा

प्रेम प्रीत की प्रेम है वाणी

सब में समाया समदर्शी स्वामी

प्रेम प्रीत कोई न मोल 

हृदय बन गया रत्न अनमोल

प्रेम प्रीत प्रेम है दान 

सब ओर दिखे एक भगवान

प्रेम प्रीत संग दुख सुख की न चिंता 

मन रहे हरि संग अचिंता

प्रेम प्रीत का सार है बैराग 

सहज मिले गोविंद गोपाल

प्रेम प्रीत हरि का धाम 

स्वयं मिलेंगे ईश्वर भगवान

प्रेम प्रीत करें उदार 

मुक्ति आएगी स्वयं तेरे द्वार।


अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू














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