# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई
# दिनांक - 18/03/2021
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - रिश्ते
# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता
अजीब सी लगती है रिश्तों की डोरी,
लगता है ख़ुदा ने स्वयं है जोड़ी ।
रिश्तों की अलग सी मर्यादा ,
विरला ही समझ पाता।
रिश्तों की कच्ची है डोरी,
सदा रखो इसको जोड़ी।
रिश्ते है सुख की छाया ,
जिसने अपना कर्तव्य खुशी से निभाया।
रिश्तों में सुख दुख आता जाता है,
हर कोई अपना फ़र्ज़ निभाता है।
रिश्तों में अहम कोई स्थान नहीं,
रिश्ते टूटने का वहां कोई नाम नहीं।
त्याग रिश्तों की बुनियाद है,
रिश्तों में होता सदा सुधार है।
मन भावों को समझाना है,
हर रिश्ते को खुशी खुशी से निभाना है ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू एवं कश्मीर, जम्मू
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