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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

कामयाबियों के मेले

 दिनांक १०/०२/२०२१

 विधा - पद्य 

शीर्षक - कामयाबियों के मेले

कामयाबियों के मेले हजार होते हैं

जिनसे ना हमारा वास्ता वो भी हमारे साथ होते हैं 

बैठे रहते हैं घंटों इंतजार में हमारे

पहले देखकर जो मुंह फेरते 

नाकामयाबियों का वक्त अकेले ही काटना हैं

ना कोई मित्र ना कोई साथी साथ है 

तुम्हें जानकर भी पराएं हो जाएंगे सब

जिन पर तुमको मान था 

छोड़ जाएंगे बीच मझधार में

जिस नाव में तुम सवार थे

कामयाबियों पर सब कोई करता सलाम है

नाकामयाबियों पर आता न कोई काम है 

पैसों  सब खेल है मतलब का साथ है

जहां न कोई अपना न पराया 

 मुश्किल में हमारे साथ है।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर,जम्मू










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