फ़ॉलोअर

रविवार, 21 फ़रवरी 2021

वर्षा की नन्ही- सी बूंद

 नमन मंच

दिनांक - २२/०२/२०२१

दिन - सोमवार

विधा - कविता

शीर्षक - वर्षा की नन्ही- सी बूंद 

वर्षा की नन्ही- सी बूंद 

चारों ओर मची है हरियाली की धूम

धरती की प्यास बुझाती है

शीतलता की देवी कहलाती है

दसों दिशाओं में खुशी है छाई

मन में  है उमंग भर आई 

टिप टिप की आवाज है करती 

मन में आनंद उल्लास है भरती 

नन्ही सी बूंद उम्मीद बढाती 

फसलें तभी फल से भर पाती|


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू



कोई टिप्पणी नहीं:

साधु-संत का संग

 साधु-संत का संग ,मिटाता कोटि पाप  वचन मान भक्ति कर, मिट जाता आपा भाव