दिनांक - २१/०२/२०२१
दिन - रविवार
नमन साहित्य बोध मंच 🙏🙏🙏 🌻🌼🌸🌺 🙏🙏🙏
विधा - कविता
विषय - कुदरत
कुदरत के कण कण में
खुशबू है प्रिय प्रेम की
सबको को मग्न करती
अपने मदहोश स्वरूप में
पेड़ों की घनी घनी छाया
माँ के आंचल सा सुख है पाया
फूलों की मनमोहक सुगंध
मन हो जाता मुग्ध
नदियों की निर्मल धारा
स्वर करती है प्यारा
लहरों का नाच निराला
लगता है पी लिया मधु प्याला
धीमी गति से हवा जो चलती
मीठी सी ठंडक एहसास कराती
ऊँची ऊँची चोटियाँ लगती है
अंबर छूने को बेकरार
पक्षियों की मधुर सी आवाज
करती है सुबह होने का आगाज ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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