फ़ॉलोअर

सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

नानी की याद

 #नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान महाराष्ट्र इकाई

#दिनांंक-19/04/2021

#दिन - शनिवार

विषय- वो बचपन और गरमी की छुट्टियां

विधा-संस्मरण 

बचपन की यादें हमेशा हमारी स्मृति में घूमती रहती है और सुखद एहसास कराती है। मुझे याद है कि हर साल जब गर्मियों की छुट्टियां स्कूल में होती थी, मैं कपडों का बैग भरकर नानी के घर जाने के लिए तैयार हो जाता। 

वहाँ जाकर खूब मस्ती करनी, तरह तरह के पकवान खाने, एक दो रुपए लेकर दुकान की तरफ भाग जाना। मुझे आज भी याद है किसी कारण मैं नानी के घर नही जा पाया था। जब मेरी तीन चार छुट्टियां बीत गई। नानी मुझे स्वयं लेने आ गई अब मेरी जान में जान आ गई। मैंने कपडों का थैला उठाया नानी के साथ चल पड़ा। 

नानी ने घर पहुंचाते ही मुझे मेरी मनपसंद खीर बनाकर दी , जिसे मैंने बड़ी खुशी के साथ खाया। नानी मुझे एक दो रुपए देने मैं दुकान की तरफ भाग जाता था। उस समय एक रुपए की दस टॉफी आती  थी, मैंने सबको दिखा दिखाकर टॉफियां खानी, मामा जी के बच्चों को बहुत चिढ़ाता था। 

नानी  सोने से पहले मुझे बहुत दिलचस्प कहानियाँ सुनाती थी, जब तक कहानी नहीं सुन लेता था तब तक नींद नहीं पड़ती थी।  मामा जी के बच्चों के साथ खेलना और शरारतें करनी मेरा नित्य का काम था। मेरी गलती होने पर भी डांट उनको पड़ती थी । जब उनको नाना-नानी और मामा-मामी से डांट पड़ती मुझे बहुत खुशी का अनुभव होता  । गर्मियों की छुट्टियां कैसे समाप्त हो जाती थी पता ही नहीं चलता था। आज भी जब नानी के पास बैठता हूं बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू

कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...