# बिषय:- रिश्ता विधा:- लघुकथा
हर एक रिश्ता हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ होता हैं। अगर रिश्ते स्वार्थपूर्ति का साधन बन जाए तो वो रिश्ता नही व्यापार बन जाता है। राकेश सिन्हा और सरिता कहने को पति पत्नी है, लेकिन दोनों हमेशा एक दूसरे के विरोध में खड़े रहते थे।
राकेश सिन्हा जो अमीर परिवार से संबंध रखता है, सरिता एक गरीब परिवार से है । राकेश हमेशा सरिता के परिवार का नाम लेकर ताने देता रहता है। एक दिन सरिता भी बोल पडी़ कब तक अपनी बेज्जती सहती, वह बोली, अगर आपको मुझसे और मेरे मायके वालों से इतनी परेशानी है तो मुझे तलाक दे दो । राकेश भी गुस्से से बोलने लगे तुम को छोड़ भी नहीं सकता क्योंकि मैनें तुमसे प्रेमविवाह किया, लोग क्या कहेंगे मेरे बारे में? तुम तो यहीं चाहती हो कि बाहर दुनिया में मेरी बदनामी हो ।
अब सरिता अपनी आँखों से आंसू पोछते हुए बोली, मेरी गलती यह है कि मैंने अपने मां बाप के खिलाफ जाकर तुमसे विवाह किया, अब मैं अपनी समस्या किसे सुनाऊँ। सरिता जोर जोर से रोने लगी। राकेश को भी अपनी गलतियों का एहसास होने लगा और उसने रोती हुई सरिता के आंसू पोछता और उसे अपने गले से लगा लेता है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
जम्मू
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