#विषय - गुरु हरकिशन साहिब जी
माता किशन कौर पिता गुरु हरराय जी बड़े भाग्यशाली कहलाते,
ईश्वर को जब अपने पुत्र के रूप में पाते,
कीरतपुर रोपड़ पंजाब की पावन भूमि जन्मस्थान कहलाई, ,
गुरु हरकिशन साहिब जी के अवतार की सब ने दी बधाई,
गुरु हरकिशन के महातेज से सब ओर हुई रोशनाई,
सिमरन भजन का नियम सतगुरु ने हमेशा कमाया,
लगता है ईश्वर गुरु हरकिशन साहिब का स्वरूप बनाकर आया,
सतगुरु ने सिमरन साधना से गुरुपिता हरराय साहिब जी को रिझाया,
गुरुपिता के हुक्म में सेवा को कमाया,
गुरु हरराय जी ने गुरु हरकिशन साहिब जी को अपना उतराधिकारी बनाया,
गुरु जी ने छोटे बड़े का भेद मिटाया,
मानवता की सेवा का सबको पाठ पढ़ाया,
बड़े भाई बाबा रामराय ने गुरु जी का बहुत विरोध किया ,
गुरुगद्दी पर अपना हक जताया,
औरगंजेब जी के पास बाबा रामराय ने गुरु जी की शिकायत पहुंचाई
गुरुगद्दी पाने के लिए रामराय जी ने ऐसी साजिश रचाई,
गुरु हरकिशन साहिब को दिल्ली बुलाया,
अधर्मी औरंगजेब ने गुरु जी का दर्शन न पाया,
राजा जयसिंह ने गुरु जी दिल्ली आने का न्यौता भेज दिया ,
गुरु जी ने निमंत्रण स्वीकार किया,
गुरु जी ने पंडित लालचंद का अहंकार तोड़ा,
अनपढ़ गंवार गुरु जी की कृपा से भगवत गीता के अर्थ बोला,
दिल्ली में भयानक चेचक का रोग आया,
गुरु जी ने तन मन धन से सेवा को कमाया,
गुरु जी की कृपादृष्टि से रोगियों को आराम आया,
गुरु हरकिशन साहिब के स्वरूप में ईश्वर स्वयं धरा पर उतर आया,
बाला प्रीतम ने 1664 में संसार को छोड़ने का निर्णय किया,
गुरुगद्दी का तिलक अपने बाबा गुरु तेग बहादुर साहिब को दिया,
गुरु जी को बाला प्रीतम कहकर संसार याद करता ,
गुरु हरकिशन साहिब की कृपा से तन मन के रोग हरता।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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