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रविवार, 15 अगस्त 2021

अमर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#क़लम की ताक़त साहित्यिक समूह, भारत

दिनांक  - 15/08/2021

दिन - रविवार से मंगलवार

 #विषय - अमर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई

विधा - छंदमुक्त कविता

अंग्रेजों को भगाने की जिसने मन ठानी थी,

वो ही अमर वीरांगना झांसी वाली रानी थी । 


मोरोपंत और भागीरथी बाई की पुत्री सबसे दिखती निराली थी,

तेरह वर्ष की आयु में  राजा गंगाधर राव संग ब्याही थी । 


 झांसी वासियों ने खूब खुशियाँ मनाई थी,

जब मनु वहाँ गई ब्याही थी । 


  आनंद राव की जननी लक्ष्मी बाई थी,

झांसी के उतराधिकारी ने उम्र बहुत कम पाई थी । 


पुत्र के निधन ने गंगाधर राव को रोगी बनाया था,

पुत्र वियोग से राजा ने मृत्यु को गले लगाया था । 


तब लक्ष्मी बाई ने झांसी की सत्ता संभाली थी,

जोश से हर मुश्किल से लड़ती रही वो आज़ादी की दीवानी थी। 


अंग्रेजी सरकार ने अनेक षडयंत्र रचाये थे,

वो रानी की हिम्मत को न डिगा पाये थे। 


रानी के दत्तक पुत्र को अंग्रेजी सरकारी ने उतराधिकारी मनाने से असहमति जताई थी,

रानी ने झांसी की आज़ादी के लिए तलवार उठाई थी । 


रानी ने रणचंडी का रूप अंग्रेजो को दिखाया था,

झांसी को अंग्रेजी सरकार से मुक्त कराया था। 


देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की आरंभ की जिसने कहानी थी,

वो ही मर्दानी झांसी वाली रानी थीं । 


अपने प्राणों को देश के लिए कुर्बान करने वाली अमर मर्दानी थी,

इतिहास जिसके वीरता के गीत गाता वो अमर बलिदानी झांसी वाली रानी थी । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर












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