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गुरुवार, 23 दिसंबर 2021

सफर ए शहादत

नमन मंच 🙏🙏🙏

शीर्षक - महान शहीद

आनंदपुर ऐसा छोडा़, 

परिवार में पड़ा गया बिछोड़ा , 

सिरसा नदी ने ऐसा कहर ढहाया, 

गुरु परिवार कभी मिल नहीं पाया। 

दो जत्थों में बंट गया परिवार, 

कैसे सुनाऊं उस समय का हाल, 

दो साहिबजादे गुरु गोबिंद सिंह संग चले, 

दो छोटे साहिबजादे दादी माँ संग चले । 

गंगू रसोईया बना मददगार ,

माता गुजरी छोटे साहिबजादों को ले चला अपने साथ, 

गंगू के मन में लालच आया,

 माँ गुजरी और छोटे साहिबजादों को कोतवाली में  बंद कराया। 

चमकौर गढ़ी को मुगल ने घेरा डाला,

 गुरु के सिंहों को झुका न पाया, 

बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह ने मुगल योद्धाओं को हराया, 

शहीदी देकर अपने पूर्वजों की कीर्ति को बढ़ाया। 


सरहिंद में लिखा गया नया इतिहास,

 धर्म में अडिग रहने का बना इतिहास, 

बजीर खान ने अत्याचार कमाया, 

छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चिनवाया । 


माता गुजरी जी ने यही शहीदी पाई, 

उनकी महिमा समस्त ब्रह्माण्ड ने गाई, 

गुरु गोबिंद सिंह ने वार दिया सारा परिवार,

 मालिक का शुक्रिया किया हर वार । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर





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