नमन मंच 🙏🙏🙏
विषय - इलाही इश्क़
इलाही इश्क़ की महिमा अपरंपार,
खोल देता जब मुर्शिद दसवां द्वार,
ह्रदय में गूंजता अनहद नाद,
कर देता तन मन को विसमाद ।
इलाही इश्क़ प्रेम सिखाये,
सबको को अपना मीत बनाये,
नफरतों को मन से मिटाये,
ईश्वर का दरस कण कण में दिखाये।
इलाही इश्क़ मन के भ्रम मिटाता,
सबको समानता का पाठ पढ़ाता,
ईश्वर का दरस हृदय में पाता,
दरस का आनंद किसी से कह नहीं पाता ।
इलाही इश्क़ इंद्रियों से परे की बात,
करता मनुष्य की क्षण में गात,
इलाही इश्क़ तन मन में भरता उल्लास,
प्रभु की महिमा गाता सांस सांस ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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