नमन मंच 🙏🙏🙏
शीर्षक - आजादी की कीमत
आजादी की कीमत दीवानों ने पहचानी थी,
तभी तो अपने प्राणों की दी हंसकर कुर्बानी थी,
अंग्रेजों को भगाने की मन में ठानी थी,
बूढ़े बड़ो में भी आ गई जवानी थी,
फांसी के फंदे पर झूली जिनकी जवानी थी,
आजादी को पाने की हिम्मत उन्होंने सब में जगानी थी,
ऐसे वीरों की गाथाएँ बच्चों को नित्य सुनाती नानी थी,
भारत की आज़ादी के लिए ,माँ भारती के पुत्रों ने दी अपनी कुर्बानी थी ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू कश्मीर
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