शीर्षक - सरहिंद की दीवार
सरहिंद की दीवार तूने कैसा रच दिया खूनी इतिहास,
तुझे देखकर लगता है पत्थर का दिल है तेरा मुझे हो गया विश्वास,
ठंडे बुर्ज भी उन बाल वीरों को झुकाने पाया,
माता गुजरी ने अपने पौत्रों को शहादतों का इतिहास सुनाया,
गुरु नानक साहेब की वाणी ने उनमें जोश जगाया,
प्रेम भक्ति में कुर्बान होने का मार्ग दिखलाया,
बजीर खान ने बाबा फतेह सिंह बाबा जोरावर सिंह को लालच दिखाया था,
लेकिन उन बाल वीरों से जीत नहीं पाया था,
तभी पापी बजीर खान ने छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चिनवाने का फरमान सुनाया था
तभी चारों ओर अंधकार छाया था,
गुरु पुत्र हंसते हंसते सरहिंद की दीवार में चिन गए,
कुर्बानियों का नया इतिहास लिख गए।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा जम्मू कश्मीर
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