रंग दे बसंती चोला गान वाले
वो कैसे मतवाले थे
वो मां भारती की आंखों के तारे थे
देश की आजादी उन मस्तमौला को
अपने प्राणों से प्यारी थी
देश से अंग्रेजों को भगाने की
उन वीरों ने मन में ठानी थी
ऐसे वीरों की कहानियां
सब में जोश भरती थी
अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार करती थी
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव को अंग्रेजी सरकार ने फांसी पर चढ़ाया था
उन वीरों के बुलंद हौसलों कोई तोड़ नहीं पाया था
२३ मार्च का दिन भारत मां के लालो की याद दिलाता है
आजादी के खातिर प्राण न्यौछावर करने वालों के आगे
सबका शीश झुक जाता है ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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