शीर्षक- अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई
अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई
खत्म हो गई माया की छाई
अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई............
मैं मेरी की अग्न इक छिन में भगाई
अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई...........
काम क्रोध अब मोहि न सताई
नाम रस से मेरा मन तन सीतलाई
अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई.........…..
अपने पराये बैरी मीत का भेद मिटाई
कण कण में अपनी परम ज्योति दिखाई
अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई...............
मोह माया का का सब बंधन तोड़ी
सांची लिव अब हम तुम से जोड़ी
अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई..........
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला- सांबा, जम्मू कश्मीर
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