शीर्षक - मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल
मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल
तभी पायेगा प्रभु का दर
मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल...........
दया भाव सबसे पर दिखाऊं
यही शुभ गुण में अपनाऊं
मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल..............
संतोष करने से तृष्णा मिट जाएं
लोभ लालच की भावना मन को सताएं
मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल............
काम क्रोध करते हैं शुभ गुणों का नाश
यह अवगुण प्रभु कृपा से गए भाग
मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल.............
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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