शीर्षक - जिंदगी कोरा कागज है
जिंदगी कोरा कागज है
चलो इसको रंगीन बनाते हैं
जो हमारे लिए जीते मरते हैं
उनका पल पल फूलों सा महकाते हैं
अच्छे पुण्य कर्मों से धरा को सजाते हैं
धरती पुत्र होने का फर्ज़ निभाते हैं
कड़वे बुरे बोलो को हृदय से बिसराते है
प्रेम प्यार गीत सबको सुनाते हैं
इंसान हैं इंसानियत को धर्म बनाते हैं
नफ़रत ,मज़हब परस्ती की भावना दिलों से हटाते हैं
जिंदगी के कोरे कागज को रंग बिरंगे भावों से सजाते हैं
शुभ गुणों से धरती को स्वर्ग सा सुंदर बनाते हैं।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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