शीर्षक - हरि नाम सच्चा धन है
हरि नाम सच्चा धन है
सुन लो मन मित्र प्यारे
जग के रिश्ते यही छूट जाएंगे
इस सच को स्वीकार कर लो
जीवन की यह घड़ियां हरि के नाम सिमरन से सफल कर लो
जग के रिश्ते सिर्फ मोह माया का बंधन
अंत काल में क्यों करता है झूठा रूदन
क्या लेकर आया था जग में
जो यहां छूट गया
तन का घड़ा फूटते ही सिर्फ पछतायेगा
हरि का नाम न सिमरन करने वाला
चौरासी लाख योनियों में आएगा ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला -सांबा , जम्मू कश्मीर
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