शीर्षक - सतगुरु मैं तेरा हूं
अच्छा हूं या बुरा हूं सतगुरु मैं तेरा हूं
अच्छा हूं या बुरा हूं...............................
तेरा दर ही मेरा सहारा
सब पापों को तूं बख्शने वाला
अच्छा हूं या बुरा हूं...............................
तूं दिलदार है मेरा
सारे जहां में हुक्म चलता है तेरा
अच्छा हूं या बुरा हूं...............................
तूं चाहे पहाड़ को चलना सिखा दें
महा पापी को संत बना दें
अच्छा हूं या बुरा हूं...............................
तेरी रहमत अगर मुझे मिल जाएं
जन्म मरण का चक्र तभी मिट पाएं
अच्छा हूं या बुरा हूं...............................
चौरासी लाख योनियों का दुख बहुत भारी
अब की बार मुझे लो उबारी
अच्छा हूं या बुरा हूं...............................
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला -सांबा, जम्मू कश्मीर
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