शीर्षक - तेरे सिमरन में सुख सारे
प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे सब धर्म ग्रंथ यही पुकारे
कोटि पापी तेरे नाम ने पल में तारे
प्रभु सिमरन में सुख सारे ............................
संसार सागर में तेरा नाम सहारा
तूं सच्चा मीत हमारा
प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे ............................
मोह माया से दिलाता छुटकारा
कण कण में दिखता तेरा रूप प्यारा
प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे ............................
विषय विकार तन मन से भाग जाते
अंतर में प्रभु आ समाते
प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे ............................
प्रभु सिमरन से अंतर चक्षु खुल जाते
अंतर में ही प्रभु का दर्शन पाते
प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे...............…............
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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