शीर्षक - श्याम तेरी बांसुरी
श्याम तेरी बांसुरी की तान में
बसते है मेरे प्राण
ओ गोपियों का कान्हा मेरे हृदय में समाना
मेरी दृष्टि से कभी दूर मत जाना
श्याम तेरी बांसुरी की तान में
बसते है मेरे प्राण .................
मेरे मन भीतर का मिट जाता है अज्ञान
ऐसी मधुर है तेरी बांसुरी की तान
श्याम तेरी बांसुरी की तान में
बसते है मेरे प्राण .................
तेरी बांसुरी श्याम मुझे नचाएं
मेरे मन भीतर से हर भय हटाए
श्याम तेरी बांसुरी की तान में
बसते है मेरे प्राण .................
तेरी बांसुरी में श्याम जादू है कैसा
हर कोई नाचता कठपुतली जैसा
श्याम तेरी बांसुरी की तान में
बसते है मेरे प्राण .................
तेरी बांसुरी की तान से हर दुख दर्द भूल जाता
हर पल हर क्षण खुशियां ही खुशियां लेकर आता
श्याम तेरी बांसुरी की तान में
बसते है मेरे प्राण .................
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला- सांबा, जम्मू कश्मीर
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