शीर्षक - भक्त प्रहलाद
भक्त प्रहलाद की भक्ति की कथा सुनाते हैं
सच्चे हृदय से भक्ति करने वालों की ईश्वर लाज स्वयं बचाते हैं
राक्षस कुल में हिरण्यकश्यप दुष्ट स्वभाव का व्यक्ति था
हरि के भक्तों को बहुत सताता था
अपने आप को ईश्वर बताता था
हरि की भक्ति करने वाले पर बहुत जुल्म कमाता था
हिरण्यकश्यप की रानी कयाधु ने एक पुत्र को दिया
उसी पुत्र ने बचपन से ही हरि का नाम हृदय में बसा लिया
हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद पर बहुत ही जुल्म किया
हरि की भक्ति छुड़वाने के लिए सांपों वाले कमरे में बंद किया
सारे सर्प भक्त प्रहलाद को शीश झुकाते हैं
भक्त वत्सल हरि की महिमा का गुणगान नित मुख से गाते हैं
हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को पहाड़ से गिराकर मारने का यत्न किया
पत्थरों ने भी भक्त प्रहलाद को फूलों जैसा एहसास प्रदान किया
ऐसे लाज बचाने वाले हरि के गुण हम क्यों नित नहीं गाते हैं
पारब्रहम की महिमा गाकर अपना जन्म सफल बनाते हैं
होलिका ने अपने भाई के साथ प्रहलाद को जिंदा जलाने की योजना बनाई थी
लगता था उस दुष्टा ने अपनी चिता स्वयं सजाई थी
होलिका ने अपनी गोद में प्रहलाद को बैठाया था
चिता की आग ने स्वयं होलिका को ही जलाया था
हरि की एक मन से भक्ति करने वाले भक्त प्रहलाद की परम गाथा गाते हैं
भक्त से परम स्नेह करने वाले परमपिता परमात्मा का यश सच्चे हृदय से सबको सुनाते हैं
जब पापी हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को गर्म स्तंभ को आलिंगन करने का हुक्म दिया
हरि जी ने नरसिंह रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप को मृत्यु की गोद में सुला दिया
ऐसे परम रक्षक हरि की महिमा सृष्टि का कण कण हर पल गाता है
उस परमपिता परमेश्वर की भक्ति का प्रताप हमें लोक परलोक में सम्मान दिलाता है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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