शीर्षक- वैराग्य क्या है
घरबार छोड़कर न होता बैराग
मायाजाल से निर्लिप्त रहकर प्रभु से करो चित् एकाग्र
कमल से सीख लो जल से निर्लिप्त रहना
सुख दुख को एक भाव में ग्रहण करना
हर कर्तव्य को खूब ईमानदारी से निभाना
कर्म के फल की कभी इच्छा नहीं करना
भेदभाव पक्षपात का भाव मन में न आएं
श्वास श्वास केवल प्रभु के गुण गाएं
समाज कल्याण की भावना का हमेशा हृदय में रखें ध्यान
ऐसा परम बैरागी ईश्वर के दर पर परवान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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