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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

प्रभु तूं ही सच्चा मित्र हमारा

 शीर्षक - प्रभु तूं ही सच्चा मित्र हमारा 

प्रभु तूं ही सच्चा मित्र हमारा

बाकी सब मोह माया का पसारा 

मेरे गुण अवगुण न विचारता 

अपनी टेक देकर मेरा काज संवारता 

संसार के सखा मीत बीच मंझार में छोड़ जाते 

रिश्ता कभी पूरा नहीं निभाते

मेरे मन की अच्छी बुरी हर  बात जानता 

तब भी परवरदिगार तूं मुझे अपना मानता 

मेरा तेरा रिश्ता  सतगुरु  कई जन्मों पुराना 

तूं मुझे मेरे मलिक कभी मत भूल जाना।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला -  सांबा ,  जम्मू कश्मीर





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